शिपिंग और बंदरगाह

37वीं लॉजिस्टिक्स स्थिति रिपोर्ट: समुद्री परिवहन में अशांति के बीच पीक सीजन

2026 में, लाल सागर संकट और ईरान संघर्ष के लगातार प्रभाव के तहत समुद्री परिवहन बाजार व्यस्त मौसम में प्रवेश कर रहा है। शिपिंग कंपनियों का लाभ मार्जिन घट रहा है, एशिया और भारत के बंदरगाहों पर भीड़ बढ़ रही है, स्पॉट माल ढुलाई दरें बढ़ रही हैं, और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव कम नहीं हो रहा है।

37वाँ लॉजिस्टिक्स स्थिति रिपोर्ट: समुद्री परिवहन में उथल-पुथल के बीच पीक सीजन

परिचय

जुलाई 2026 में, वैश्विक समुद्री परिवहन उद्योग लगातार भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पारंपरिक पीक सीजन में प्रवेश कर रहा है। लाल सागर संकट और ईरान-अमेरिका संघर्ष का दोहरा दबाव, एशियाई हब बंदरगाहों पर भीड़भाड़ के फैलने के साथ मिलकर, शिपिंग कंपनियों, माल मालिकों और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रहा है। नवीनतम जारी "37वीं लॉजिस्टिक्स स्थिति रिपोर्ट: समुद्री परिवहन" बताती है कि यद्यपि उद्योग पूर्ण पतन से बच गया है, लेकिन माल ढुलाई दरों की प्रवृत्ति, क्षमता आवंटन और आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता अभी भी स्पष्ट नहीं है।

प्रमुख विकास

2026 की पहली तिमाही में प्रमुख शिपिंग कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन स्पष्ट रूप से भिन्न रहा: CMA CGM का शुद्ध लाभ साल-दर-साल 8.5% घटकर 8 बिलियन डॉलर हो गया; मार्स्क को 192 मिलियन डॉलर का EBIT घाटा हुआ; हापाग-लॉइड ने समूह EBITDA 494 मिलियन डॉलर दर्ज किया, लेकिन 2025 की समान अवधि की तुलना में 55% की भारी गिरावट आई।

परिचालन स्तर पर, भारत के प्रमुख ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों - मुंद्रा और न्हावा शेवा - और संयुक्त अरब अमीरात के खोर फक्कन में गंभीर भीड़भाड़ देखी गई। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद या असुरक्षित रहेगा, भीड़भाड़ की स्थिति में कमी नहीं आएगी। माल के चक्कर लगाने से वैकल्पिक मार्गों पर दबाव बढ़ गया है, और पीक सीजन से पहले जहाजों की समयबद्धता और खराब हो गई है।

आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव

स्पॉट फ्रेट दरों ने सबसे पहले प्रतिक्रिया दी है। Xeneta के मुख्य विश्लेषक पीटर सैंड ने बताया कि चीन से अमेरिका के पश्चिमी तट तक के मार्ग पर स्पॉट दरों में 37% की वृद्धि हुई है, इसका कारण मध्य पूर्व की स्थिति से उत्पन्न भीड़भाड़ का सिंगापुर, तंजुंग पेलेपास और क्लैंग जैसे एशियाई ट्रांसशिपमेंट हब से बाहर फैलना है।

ड्रयूरी की आपूर्ति श्रृंखला परामर्श शाखा के प्रबंध निदेशक फिलिप डेमास ने कहा कि वसंत अनुबंध वार्ता में कई प्रमुख मार्गों पर वार्षिक अनुबंध दरों में गिरावट आई है, लेकिन भविष्य की प्रवृत्ति पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने पर निर्भर करती है। "यदि जलडमरूमध्य जल्दी से नेविगेशन के लिए फिर से नहीं खुलता है, तो माल ढुलाई दरें लंबे समय तक उच्च बनी रहेंगी।"

ईंधन अधिभार पीक सीजन में परिवहन लागत का एक और महत्वपूर्ण दबाव है। ड्रयूरी ने माल मालिकों को स्वतंत्र ईंधन समायोजन नीतियों को लागू करने और वाहकों के ईंधन अधिभार की सख्ती से जांच करने की सलाह दी, ताकि "विशेष ईंधन अधिभार" जैसी मदों के कारण दोहरे शुल्क से बचा जा सके।

बंदरगाह प्रभाव विश्लेषण

भारत के मुंद्रा बंदरगाह और न्हावा शेवा बंदरगाह, दक्षिण एशिया के प्रमुख ट्रांसशिपमेंट नोड के रूप में, चक्कर लगाने वाले जहाजों के जमाव और परिचालन दक्षता में कमी के कारण जहाजों के प्रतीक्षा समय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। संयुक्त अरब अमीरात का खोर फक्कन बंदरगाह भी क्षमता से अधिक काम का सामना कर रहा है। इन बंदरगाहों का भीड़भाड़ प्रभाव एशिया के अन्य हबों तक फैल रहा है, सिंगापुर, क्लैंग आदि में कंटेनर थ्रूपुट दबाव हाल के उच्च स्तर पर है। पीक सीजन में बंदरगाह बुनियादी ढांचे की बाधाएं प्रभावी क्षमता को और सीमित कर देंगी।

माल परिवहन और परिवहन

केप ऑफ गुड होप के चक्कर लगाने वाले मार्ग समायोजन के कारण एशिया-यूरोप मार्ग पर परिवहन समय 8 से 12 दिनों तक बढ़ गया है, और ईंधन की खपत भी बढ़ गई है।## माल ढुलाई और परिवहन

केप ऑफ गुड होप के चक्कर लगाने वाले मार्ग समायोजन के कारण एशिया-यूरोप मार्ग पर परिवहन समय 8 से 12 दिन बढ़ गया है, और ईंधन की खपत भी बढ़ गई है। मासर्स्क और हैपैग-लॉयड जैसी शिपिंग कंपनियों को कुछ मार्गों पर नाममात्र क्षमता कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, विशेष रूप से उत्तरी यूरोप-उत्तरी अमेरिका और एशिया-पश्चिमी अमेरिका जैसे व्यापार मार्गों पर ब्लैंक सेलिंग लागू की गई है। मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी भी प्रभावित हुई है, और अंतर्देशीय रेल और सड़क परिवहन की व्यवस्था में जहाजों के आगमन के समय की अनिश्चितता के कारण बार-बार बदलाव किए जा रहे हैं।

क्षेत्रीय प्रभाव

  • एशिया-उत्तरी अमेरिका: चीन से पश्चिमी अमेरिका तक स्पॉट फ्रेट दरों में भारी वृद्धि हुई है, जबकि कॉन्ट्रैक्ट फ्रेट दरों में विभाजन देखा गया है। शिपिंग कंपनियां उच्च स्पॉट दरों वाले मार्गों पर क्षमता लगाना पसंद कर रही हैं, जिससे कुछ कॉन्ट्रैक्ट स्लॉट को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
  • मध्य पूर्व-एशिया: होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के कारण बड़ी संख्या में जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे का चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे मध्य पूर्व के हब बंदरगाहों (जैसे जेबेल अली) का थ्रूपुट अस्थायी रूप से गिर गया है, लेकिन क्षेत्रीय ट्रांसशिपमेंट केंद्र की स्थिति प्रभावित हुई है।
  • यूरोप: उत्तरी यूरोप के बंदरगाहों पर चक्कर लगाने वाले जहाजों की संख्या बढ़ गई है, और हैम्बर्ग, रॉटरडैम जैसे बंदरगाहों पर रेल और जलमार्ग के माध्यम से माल ढुलाई का दबाव बढ़ गया है।
  • भारतीय उपमहाद्वीप: मुंद्रा और नेहरू में भीड़ के कारण शिपिंग कंपनियां अस्थायी रूप से कॉल के बंदरगाहों को बदल सकती हैं, और कोलंबो तथा श्रीलंका के अन्य बंदरगाह कुछ कार्गो को डायवर्ट कर सकते हैं।

उद्योग के दृष्टिकोण

ड्र्यूरी ने कहा कि वर्तमान फ्रेट दरों में ऊपर की ओर जोखिम होने के बावजूद, मध्यम से लंबी अवधि में क्षमता अधिशेष के दबाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अनुमान है कि 2027 में वैश्विक कंटेनर क्षमता में 7% और 2028 में 10% की वृद्धि होगी, जो कार्गो मांग की वृद्धि दर से काफी अधिक है। इसका मतलब है कि संकट कम होने के बाद, बाजार तेजी से क्षमता अधिशेष और दरों में गिरावट की ओर बढ़ सकता है। डैमस ने सुझाव दिया: "शिपर्स को विश्वसनीय वाहकों के साथ गहरे सहयोग संबंध स्थापित करने को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि वे अधिक सौदेबाजी की शक्ति और स्लॉट सुरक्षा प्राप्त कर सकें।"

भविष्य का दृष्टिकोण

अल्पावधि में, पीक सीजन आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को उजागर करता रहेगा। शिपर्स को आपूर्ति श्रृंखला में अतिरिक्त बफर समय जोड़ना होगा और मुख्य मार्गों पर क्षमता प्रतिबद्धताओं को सुनिश्चित करना होगा। यदि 2026 की चौथी तिमाही तक होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो पूरे वर्ष वैश्विक कंटेनर व्यापार की मात्रा में नकारात्मक वृद्धि हो सकती है, और फ्रेट दरें उच्च स्तर पर बनी रहेंगी। मध्यम से लंबी अवधि में, शिपिंग कंपनियों की क्षमता नियंत्रण रणनीतियां और पर्यावरण नियम (जैसे यूरोपीय संघ उत्सर्जन व्यापार प्रणाली) संयुक्त रूप से क्षमता संरचना को आकार देंगे। मल्टीमॉडल परिवहन और वैकल्पिक व्यापार गलियारों (जैसे चीन-यूरोप रेलवे, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप गलियारा) पर ध्यान बढ़ने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

2026 का समुद्री पीक सीजन उच्च अनिश्चितता के साथ शुरू हुआ है। भू-राजनीतिक जोखिम, बंदरगाह भीड़, और ईंधन लागत - ये तीन कारक वैश्विक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के लिए लगातार चुनौती पेश कर रहे हैं। शिपिंग कंपनियां क्षमता और अधिभार को समायोजित करके प्रतिक्रिया दे रही हैं, जबकि शिपर्स को अधिक सक्रिय जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता है - जिसमें लंबी लीड टाइम, करीबी साझेदारी संबंध, और सख्त लागत ऑडिट शामिल हैं। आने वाले 12 महीनों में, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन और अनुकूलनशीलता की अंतिम परीक्षा होगी।

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  1. https://www.logisticsmgmt.com/article/37th_state_of_logistics_oceanPrimary

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